अधिकार :
👉 अधिकार वे हक है जो एक इंसान को जीवन जीने के लिए चाहिए, जिसकी वो माँग करता है।
👉 अधिकार समाजिक जीवन की वे परिस्थितियाँ है जिनके बिना कोई भी मनुष्य अपना विकास नहीं कर सकता है।
अधिकारों का घोषणा पत्र :
👉 संविधान द्वारा प्रदान किए गए और संरक्षित अधिकारों की सूची को ‘अधिकारों का घोषणा पत्र‘ कहते हैं।
👉 यह सरकार को नागरिकों के अधिकारों के विरुद्ध काम करने से रोकता है।
👉 यह उल्लंघन होने पर उपचार सुनिश्चित करता है।
👉 # 1928 में ‘मोतीलाल नेहरू समिति’ ने ‘अधिकारों का घोषणा पत्र’ की माँग की थी।
मौलिक अधिकार
👉 ऐसे अधिकार जो किसी व्यक्ति के जीवन जीने के लिए अति आवश्यक होते है और जो संविधान में सूचीबद्ध एवं संरक्षित होते है, उन्हें मौलिक अधिकार कहते है ।
👉 ये इतने महत्वपूर्ण होते है कि संविधान स्वयं यह सुनिश्चित करता है कि सरकार भी इनका उल्लंघन न कर सकें।
👉 इनकी सुरक्षा की गारंटी स्वयं संविधान लेता है।
साधारण अधिकार एवं मौलिक अधिकार
👉 जहाँ साधारण कानूनी अधिकारों को सुरक्षा देने व लागू करने के लिए साधारण कानूनों का सहारा लिया जाता है, वहीं मौलिक अधिकारों की गारंटी एवं सुरक्षा स्वयं संविधान करता है।
👉 सामान्य अधिकारों को संसद कानून बना का परिवर्तित कर सकती है लेकिन मौलिक अधिकारों में परिवर्तन के लिए संविधान में संशोधन करना पड़ता है।
👉 सरकार का कोई भी अंग मौलिक अधिकारों के विरुद्ध कोई कार्य नहीं कर सकता ।
👉 सरकार के कार्यों से मौलिक अधिकारों के हनन को रोकने की शक्ति एवं इसका उत्तरदायित्व न्यायपालिका के पास है।
👉 विधायिका या कार्यपालिका के किसी भी कार्य या निर्णय से यदि मौलिक अधिकारों का हनन होता है तो न्यायपालिका उसे अवैध घोषित कर सकती है।

