संविधान :
संविधान नियमों और सिद्धांतों का एक ऐसा दस्तावेज है जिससे सरकार के विभिन्न अंगों की शक्तियों और नागरिकों के अधिकारों की जानकारी मिलती है। इसके साथ-2 सरकार की सीमाओं का निर्धारण भी होता है।
संविधान दो तरह के होते है
👉 लिखित संविधान - भारत
👉 अलिखित संविधान - इंग्लैंड
संविधान की आवश्यकता एवं महत्त्व :
👉 संविधान तालमेल बैठाता है :
संविधान विभिन्न राज्यों में तालमेल बिठाता है। संविधान नागरिकों में यह विश्वास उत्पन्न करता है कि यदि उनके अधिकारों को छिना जाता है तो वह न्यायालय जा सकता है। संविधान में अनेक बुनियादी नियम होते हैं। यदि ये बुनियादी नियम नहीं होंगे तो नागरिक अपने आप को असुरक्षित महसूस करेगा इसलिए संविधान का पहला काम यह है कि वह बुनियादी नियमों का ऐसा समूह उपलब्ध कराए जिससे समाज के सदस्यों में विश्वास बना रहे।
👉 सरकार की शक्तियों पर सीमाएँ लगाता है :
संविधान का एक कार्य सरकार द्वारा अपने नागरिकों पर लागू किए गए नियमों की सीमा को तय करना है। उदाहरण के लिए सरकार किसी भी नागरिक को मनमाने ढंग से गिरफ्तार नहीं कर सकती है।
👉विभिन्न अंगों की जानकारी :
संविधान से सरकार के विभिन्न अंगों की जानकारी मिलती है, जैसे- विधायिका,कार्यपालिका और न्यायपालिका।
👉 निर्णय लेने की शक्ति :
संविधान यह तय करता है कि कानून कौन बनाएगा, कानून किस प्रकार से लागू होंगे और जनता के प्रतिनिधि कैसे चुने जाएंगे? उदाहरण के लिए भारतीय संविधान यह स्पष्ट करता है कि अधिकतर कानून संसद बनाएगा और संसद का गठन कैसे होगा इसका वर्णन भी भारतीय संविधान में है।
👉 समाज की आकांक्षाएं और लक्ष्य :
पुराने संविधान में केवल सरकार की शक्तियों का ही वर्णन होता था लेकिन आधुनिक संविधान सरकार के सकारात्मक कार्यों और समाज की आकांक्षाओं को भी अभिव्यक्त करता है।उदाहरण= भारतीय संविधान यह अपेक्षा करता है कि समाज में जातीय भेदभाव न हो। इसी प्रकार दक्षिण अफ्रीका का संविधान रंगभेद पर रोक लगाता है। संविधान की सबसे महत्वपूर्ण योग्यता यह है कि यह समाज की बुनियादी पहचान है।
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार :
👉 एक निश्चित आयु के बाद हर व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के मत देने का अधिकार “सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार” कहलाता है।
👉 भारत में यह आयु 18 वर्ष या इससे ऊपर है। यहाँ सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के मत देने का अधिकार दिया गया है।
भारतीय संविधान कैसे बना ? :
👉 भारतीय संविधान अंग्रेजी शासन के समय बनना शुरू हुआ। इसे बनाने में 2 साल 11 महीने और 18 दिन का समय लगा।
👉 इसे “संविधान सभा” नामक संस्था द्वारा बनाया गया।
👉 सविधान सभा का विधिवत उद्घाटन सोमवार, 9 दिसंबर 1946 को सुबह 11:00 बजे हुआ।
👉 संविधान सभा की कुल 166 दिन तक बैठक चली।
👉 पहली बैठक 9 दिसम्बर 1946 को हुई जिसमें डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को संविधान सभा का अस्थायी अध्यक्ष चुना गया।
👉 11 दिसम्बर 1946 को संविधान सभा का अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद को तथा संविधान प्रारूप समिति का अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर को चुना गया।
👉 13 दिसम्बर 1946 को पंडित जवाहर लाल नेहरू ने संविधान का ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ प्रस्तुत किया।
👉 इसमें भारत के प्रभुता-संपन्न लोकतांत्रिक गणराज्य की रूपरेखा प्रस्तुत की गई जिसे 22 जनवरी 1947 को संविधान सभा ने स्वीकार किया।
👉 संविधान सभा के सदस्य 1935 में स्थापित प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष विधि द्वारा चुने गए थे।
कैबिनेट मिशन की शिफारिशें/ प्रस्ताव :
👉 प्रत्येक प्रांत,देशी रियासत या रियासतों के समूह को उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें दे दी गई। 1 लाख की जनसंख्या पर एक सीट का अनुपात रखा गया।
👉 सविधान सभा के सदस्यों की संख्या 389 निर्धारित की गई। जिसमें से 292 प्रतिनिधि ब्रिटिश भारत के गवर्नरों के अधीन 11 प्रांतों से, 4 प्रतिनिधि चीफ कमिश्नरों के 4 प्रांतों (दिल्ली,अजमेर-मारवाड़ कुर्ग और ब्रिटिश बलूचिस्तान) से और 93 प्रतिनिधि देसी रियासतों से आए थे।
👉 प्रत्येक प्रांत की सीटों को तीन प्रमुख समुदायों मुसलमान,सिख और सामान्य में उनकी जनसंख्या के अनुपात में बांट दिया गया।
👉 प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों को समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली और एकल संक्रमण मत प्रणाली से चुना गया।
👉 देसी रियासतों के प्रतिनिधियों का चुनाव का तरीका उनके परामर्श से तय किया गया।
संविधान सभा का स्वरूप :
👉 संविधान सभा में आरंभ में 389 सदस्य थे। 3 जून 1947 की माउंटबेटन योजना के अनुसार विभाजन के बाद सदस्यों की संख्या घटकर 299 रह गई। जिसमें से 26 नवंबर 1949 को कुल 284 सदस्यों ने संविधान पर हस्ताक्षर किए।
👉 संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर नहीं हुआ परंतु इसमें इस बात का प्रयास किया गया कि सभी समुदायों का प्रतिनिधित्व हो।
👉 संविधान सभा में अनुसूचित जातियों के 28 सदस्य थे।
👉 भारत के संविधान में एक नागरिकता की बात कही गई और अल्पसंख्यकों के हितों को महत्व दिया गया।
👉 संविधान सभा में कांग्रेस का वर्चस्व था।
👉 82% सीटें कांग्रेस की थी लेकिन कांग्रेस की विविधताओं से भरी पार्टी थी जो अनेक वर्गों की नुमाइंदगी करती थी।
संविधान सभा के कामकाज की शैली :
👉शक्तियों को लेकर मतभेद
संविधान सभा के सदस्य सविधान बनाते समय एक-दूसरे के हितों को ध्यान में रखते थे। सदस्यों में प्रायः कुछ विषयों पर मतभेद हो जाते थे,जैसे न्यायपालिका को क्या शक्ति दी जाए,केंद्र सरकार और राज्य सरकार के संबंध कैसे हो आदि।
👉सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार
संविधान सभा में केवल एक ही ऐसा प्रावधान था जो बिना किसी बहस के पास हुआ। वह था सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार।
👉 चर्चा और तर्कपूर्ण बहस
संविधान सभा के सदस्य प्रत्येक विषय पर गंभीर चर्चा एवं विचार विमर्श किया करते थे और समाज के सभी हितों को ध्यान में रखते थे।
👉 विस्तृत अध्ययन व प्रकाशन
संविधान सभा सार्वजनिक हित के लिए कार्य कर रही थी। संविधान सभा में प्रत्येक अनुच्छेद पर विस्तृत और बारीकी से चर्चा की जाती थी और उनको मोटे-मोटे खंडों में प्रकाशित किया जाता था।
👉 कई प्रावधानों पर निर्णय मत विभाजन द्वारा लिए गए।
विभिन्न देशों के संविधान से लिए गए प्रावधान :
👉 ब्रिटिश संविधान
● सर्वाधिक मत के आधार पर चुनाव में जीत का निर्णय
● सरकार का संसदीय स्वरूप
● कानून के शासन का विचार
● विधायिका में अध्यक्ष का पद और उसकी भूमिका
● कानून निर्माण की विधि
👉 अमेरिका का संविधान
● मौलिक अधिकारों की सूची
● न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति और न्यायपालिका की स्वतंत्रता
👉 आयरलैंड का संविधान
● राज्य के नीति-निर्देशक तत्व
👉 फ्रांस का संविधान
● स्वतन्त्रता, समानता, बंधुत्व का सिद्धांत
👉 कनाडा का संविधान
● एक अर्द्ध-संघात्मक सरकार का स्वरूप
● अवशिष्ट शक्तियों का सिद्धांत
👉 दक्षिण अफ्रीका का संविधान
● जनहित याचिका
👉 ब्राज़ील का संविधान
● स्थानीय शासन की विचारधारा
👉 सोवियत संघ(रूस)
● मौलिक कर्तव्य
👉 ऑस्ट्रेलिया का संविधान
● प्रस्तावना की भाषा
● समवर्ती सूची
● केंद्र-राज्य के बीच शक्ति का विभाजन
👉 जर्मनी का संविधान
● आपातकाल
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